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Jul 12, 2014

KUSHTI DANGAL AT SARDHANA, NEAR MEERUT IN UTTAR PRADESH

By Deepak Ansuia Prasad












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सरधना दंगल

मेरठ से कुछेक किलोमीटर की दूरी पर सरधना टाउन हैं। सरधना शहर का इतिहास काफी रोचक हैं , सरधना में प्राचीन शिव मंदिर है , ये जगह हस्तिना पुर के पास भी कही जा सकती हैं , इसी शिव मंदिर में पांडवों ने लाक्षागृह जाने से पहले पूजा अर्चना की थी। लाक्षागृह जल गया पांडव बच गए भोलेनाथ की किरपा जो थी।
यहीं पर बेगम समरू का चर्च भी हैं , मूल रूप से मुस्लिम फरजाना , जेबुन्निसा की छोटी उम्र में ही मर्सिनरी वाल्टर राईनार्ट सोमरे से शादी हो गई थी , सोमरे से ही समरू उनके नाम के साथ जुड़ा। उन्होंने जो शानदार चर्च 1872 में बनाया ,उसे बाद में पोप ने बेसिलिका घोसित किया और आज वो राष्ट्रीय धरोहर हैं और अपने मूलरूप में आज भी सरधना टाउन की शान बढ़ा रहा हैं। बेगम समरू ने अंग्रेजों के समय में भी राज किया , दिल्ली के बादशाह शाह आलम को भी तीस हज़ार सिखों से समरू बेगम ने ही बचाया था , आज भी दिल्ली में उस जगह जहाँ तीस हज़ार सिखों ने कैंप लगाया था तीस हज़ारी कहते हैं , सरधना में चर्च में ही बेगम समरू की कब्रगाह हैं।
एक बेहतरीन स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय है जहाँ के बच्चों ने गणित में फार्मूले बनाने के लिए अमरीका और जापान तक गए।
हिन्दुस्तान के पहले फोटोग्राफर राजा दीन दयाल , जिन्हे हैदराबाद के निज़ाम मीर महबूब अली संरक्षण देते थे सरधना के ही थे।
सरधना के नवाब सैयद अमजद अली शाह रहे जिनकी आगे आने वाली पीढ़ियों में सूफी संत इदरीश शाह ने जन्म लिया।
उर्दू के मशहूर लेखक मौलाना सादिक हुसैन सरधानवी भी सरधना से ही हैं। इस प्रकार मंदिर , मस्जिद और गिरजों का ये शहर अपने आप में अद्भुत हैं।

सरधना में इस बार 11 साल बाद दंगल का आयोजन हुआ। दंगल कमिटी के सदस्य परवेज पहलवान ने बताया की 11 साल पहले यहाँ कुछ बवाल हो गया था , लेकिन इस बार सरधना के निवासी सभी जाती धर्म के लोगों ने खेलों खासकर कुश्ती खेल की बेहतरी और नई पीढ़ी के बच्चों के दिलों में खेलों के प्रति जागरूकता लाने के लिए दंगल का आयोजन किया गया। इस बार यह दंगल लगातार तीन बार हर शनिवार को कराया गया। जिसमे से दूसरे शनिवार की कवरेज के लिए मुझे भी आमंत्रित किया गया।

दंगल में बाल पहलवानो की बहुत कुश्तियां हुई। बाल पहलवानो को हौसला मिला , शायद अपने इस अनुभव का वो आगे आने वाले कुश्ती दंगलों में उठाएंगे। दंगल में पहली कुश्ती तस्लीम और विवेक पहलवान के बीच हुई। दोनों बढ़िया पहलवान है , और बढ़िया कुश्तियां दिखा कर दोनों पहलवानो ने सरधना निवासियों का दिल जीत लिया।

दंगल में आये सभी पहलवानो की कुश्तिया करवाई गई। कमेटी मेंबर असलम ने बताया की उन्होंने बहुत मेहनत से दंगल कराने की तैयारियां की , जैसे दंगल की परमिशन लेना , पहलवानो के लिए इनाम की व्यवस्था करना। अखाड़े और अन्य साजो सम्मान की तैयारिया , उन्होंने बताया की उन्हें दंगल की सफलता देख कर बहुत ख़ुशी महसूस हुई और वो प्रति वर्ष यह दंगल कराते रहेंगे.

दंगल की समाप्ति पर गुरु खलीफाओं के साथ जलपान किया , दंगल कमेटी के सदस्यों को दंगल की सफलता की शुभकामनाएं देकर घर लौट चला।


ENGLISH VERSION


Sardhana is a town in Uttar Pradesh where Hindu, Muslim and Christians all live together peacefully.

There have been some problems in the past and 11 years ago the town decided to stop an annual wrestling competition because of differences among the people. But now the situation has improved and the dangal has been revived. Dangal committee member Parvej and his friend Aslam told me they want to spread the culture of kushti, brotherhood and peace through the sport among the people of Sardhana.

The competition took place over three weekends. I visited the second dangal in the series and found a large crowd there. Referee Rajinder Pahlwan was busy pairing wrestlers. It was a good opportunity for junior wrestlers because they had many chances to wrestle.

The first prize match was between Tasleem and Vivek, both experienced wrestlers. Both wrestlers fought well. The bout was scheduled for 15 minutes. I think the time keeper lost track and stopped the bout early, which was objected to by both the wrestlers, so the match resumed for 5 more minutes. However both the wrestlers were so good that neither could secure a pin and the bout was declared a draw.

After the competition I met all the committee members, thanked them for such a good event. I told them that this is the best thing they have done and wished them to continue the tradition.