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Apr 30, 2017

KUSHTI WRESTLING: Sitara e Indore by Yusuf Qureshi.

By Deepak Ansuia Prasad







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इसमें अब कोई शक या शुब्हा न रहा की नासिर कुरैशी पहलवान अब रुस्तम बन गया हैं। कासन ,गुडगाँव के दंगल में नासिर ने बढ़िया कुश्ती दिखाई थी जिसकी चर्चा भी खूब हुई। हालांकि मैंने वो कुश्ती नहीं देखी पर कुश्ती प्रेमियों में उसकी बहुत चर्चा हुई , नासिर ने किस पहलवान को कितना रगड़ा एंड फलां फलां । पर उसके बाद नासिर ने एक के बाद एक बढ़िया कुश्तियां लड़ी। हाल ही में सितारा ऐ इंदौर में जम्मू और कश्मीर के नामी पहलवान बेनिया को आसमान दिखा नासिर ने कुश्ती की दुनिया में अपना रुतबा बना लिया हैं , या समझो झंडा गाड़ दिया हैं। आओ कोई भी , नासिर तैयार हैं। नासिर पहलवान को मेरी तरफ से बहुत बहुत बधाइयां। बेनिया पहलवान एक बेहतरीन पहलवान हैं , उसने देश भर के पहलवानो से कुश्तियां लड़ी भी और जीती भी हैं। वर्षों से कुश्ती के लिए लिखते बोलते मुझे भी नासिर ने निशब्द कर दिया। मुझे लगा बेनिया भारी हैं । लेकिन नासिर भी कोई मिटटी का थोड़ी बना था । नासिर ने बेनिया को बखूबी कण्ट्रोल किया , नीचे बिठाया , इधर लटकाया , उधर खेंचा पर डिफेन्स के पक्के बेनिया ने नासिर के नीचे से ही नासिर की लंगोटी में हाथ देकर लोट मारी और धड़ फेंका तो दर्शकों की साँसे थम गई , बाल बाल बचे थे नासिर पहलवान । फिर तो नासिर ने जो अटैकिंग मोड़ पकड़ा तो रुकने का नाम न लिया रफ़्तार कम न की , इधर उधर , अखाड़े के चारों तरफ बेनिया को छका कर , भागते पहलवान को जनेऊ गेर कर झोली बना डाली। मैंने वीडियो में देखा , एक दर्शक कह रहा था बाप ! रे बाप ! नासिर ने ऐसी झोली भरी की झोली में जीत आ गिरी , दर्शकों की चीख पुकार , हर्षो उल्लास और उनके दिए नकद इनाम साथ में । दर्शकों के रोमांच का ठिकाना न रहा। सच कहूँ , मजा आगया मुझे भी। हाँ बेनिया ने प्रोटेस्ट जरूर किया लेकिन दर्शकों ने बेनिया की छाती पे चढ़े नासिर को देख लिया था। अब क्या हो सकता था , निर्णायक तो पहले ही निर्णय दे चुके। वास्तव में एक बड़े पहलवान के लिए बड़ा कठिन समय रहा होगा। भाई युसूफ कुरैशी ने नासिर को नकद इनाम दिया।

दंगल निपटने के बाद देर रात हमने साथ में ही रोटियां तोड़ी। तो नासिर ने बताया की वो सुबह जहाज पकड़ेगा और दिल्ली उतर जाएगा। मुझे बहुत ख़ुशी हुई। दिल्ली में बहुत पोलुशन हैं भाई , कलेजे फेफड़े छोटे पड़ गए हैं लोगों के। ऐसे में अपना पहलवान सुन्दर आबो हवा वाले जम्मू कश्मीर के श्रेष्ट पहलवान को धुल चटा दे तो दो दिन और दिल्ली में रहने का दिल करता हैं। नहीं तो क्या बताऊँ भाई ? आप दिल्ली के आसमान को देखेंगे तो आपको लगेगा की बारिश होने वाली हैं , ये बादल नहीं स्मॉग हैं , यहाँ सूरज दिन में ही चाँद की तरह लगता हैं , धुल भरा चाँद ! वैसे तो क्या नहीं हैं दिल्ली में अपने मोदी जी , केजरीवाल टाटा , बाटा अम्बानी और न जाने कितने रईसों की कंपनियां। मोदी जी के पास डंडा हैं अगर वो चाहें तो डंडा घुमा दें दिल्ली फिर हरी भरी हो जायेगी , या फिर ये टाटा जैसी कंपनियां ये यहूदी लोग ये अम्बानी लोग खरबों इकट्ठा कर रहे हैं , जहाँ से ये लूट खसोट रहे हैं , अगर चाहें तो ये भी अपनी कमाई का जरा सा हिस्सा लगा के दिल्ली वालों को प्रदुषण और मौत से बचा सकते हैं। ये चाहे तो शहर की काया पलट कर दें , इतना पैसा यहीं से कमाया हैं इन्होने। क्या आपने कभी सोचा हैं ये ऐसा क्यों नहीं करते ? अरे सिकंदर भी खाली हाथ गया था , तुम क्या लेके जाओगे ? लेकिन इन्होने अपने अपने कमरों में ऐरकण्डीशनर लगा लिए , अब दिल्ली वालों को एयर प्योरिफायर बेचेंगे। पहले जमना में के पानी में दाल पकती हमने देखी हैं अब तो आर ओ के पानी में भी नहीं गल रही। दिल्ली को इन उद्योगपतियों ने नरक बना दिया , इनकी पैसे की भूख नहीं मिटती।

भाई युसूफ कुरैशी ने मुझे सितारा ऐ इंदौर देखने का आमंतरण दिया तो मुझे बहुत ख़ुशी हुई। उन्होंने दंगल को एक यादगार दिन बनाने के लिए जी तोड़ मेहनत की थी। उज्जैन का नेहरू स्टेडियम यूँ तो खासतौर पर कुश्ती का ही स्टेडियम हैं लेकिन दंगल के दिन उसकी शोभा देखते ही बनती थी। पूरे स्टेडियम को फूल पत्तियों और रंग बिरंगी गुब्बारों से सजाया गया था। एक और भव्य स्टेज तो अखाड़े के चारों और दर्शकों के लिए कुर्सियों पर बैठने का इंतजाम दंगलों में विरले ही देखने को मिलता हैं।
कुश्ती से जुडी महान हस्तियों जैसे काका पवार , पप्पू यादव , नकुल पाटोदी और अनेकों ख्याति प्राप्त शख्शियतों को दंगल में बुला कर उनका मान सम्मान करना एक बेतरीन सराहनीय काम था। दंगल में देश भर से बेहतरीन पहलवान पहुंचे जिनमे दिल्ली के कप्तान चांदरूप अखाड़े से जोगिन्दर पहलवान हिन्द केसरी , प्रवेश पहलवान हिन्द केसरी बहादुरगढ़ से , दिल्ली के गुरु हनुमान अखाड़े से नासिर कुरैशी , महाराष्ट्र से काका पवार के शिष्य किरण भगत , हरिओम ट्रेक्टर , युधिष्ठिर , राज सांगते और अन्य।


महिला पहलवानो को मौका देना दंगल का एक बेहतरीन पहलु रहा इसके लिए युसूफ भाई को लाख लाख बधाइयां। दंगल में बाल पहलवानो , जूनियर्स , लोकल पहलवान व् महाराष्ट्र , मध्यप्रदेश के बेहतरीन पहलवानो की बंधी कुश्तियां हुई। कुश्तियां शानदार थी।

युसूफ भाई ने कुश्ती से जुड़े लोगों का बढ़िया स्वागत सत्कार किया। फोटो में कुश्ती से जुड़े गणमान्य लोग। मेरा फोटो नहीं खिंच सका। फिर भी युसूफ भाई को शानदार दंगल कराने के लिए बहुत बहुत बधाई।

दंगल कमिटी और इंदौर की जनता की तरफ से युसूफ भाई का स्वागत।

मैं रात में फोटो ग्राफी नहीं करता लेकिन कसम नहीं खाई। दरअसल रात में फोटोग्राफी के नियम बदल जाते हैं खाली कैमरा के बटन पे वजन नहीं डाला जाता। फिर भी , दंगल पूरी रात चला तो कुछ क्लिक किया।
अगर जनता जनार्दन न हो तो कैसा दंगल ? इंदौर की जनता कुश्ती प्रेमी हैं। उनकी हौसला अफजाई का शुक्रिया।
जनता के बीच से ही हैं विशिस्ट लोग , जिन्हे उनके ख़ास कुश्ती प्रेम की ही वजह से कुश्ती के मैदान में बुलाया जाता हैं। वे पहलवानो का हाथ मिलाते हैं , उन्हें आशीर्वाद देते हैं।

इंदौर में ही हैं कुश्ती की सबसे मशहूर , ख्यातिप्राप्त और लगभग साठ ज्यादा साल से चल रही पत्रिका " भारतीय कुश्ती " का ऑफिस। और पत्रिका की शुरुआत करने वाले दादा रतन पाटौदी का घर भी या यूँ कहिये हवेली। आज उनके पुत्र नकुल पाटोदी पत्रिका को प्रकाशित कर रहे हैं। दादा के नक़्शे कदम पर चलते हुए उनका कहना हैं की , पत्रिका को चलाना दादा की इच्छा थी। परंपरा को निभाना हैं , जो उन्होंने शुरू की थी सो वे किसी भी हालत में इसे बंद न करेंगे । दादा मेरे भी आदर्श रहे हैं। उनका कुश्ती प्रेम जग जाहिर हैं। आज बेशक वे हमारी दुनिया में नहीं हैं , लेकिन उन्होंने न जाने कितनो को कुश्ती के ऊपर लिखने बोलने की प्रेरणा दी। नकुल पाटोदी जी के घर पर ही उनके साथ सप्रेम भोजन का आनंद लिया , उनके जिम को देखा बेहतरीन था , साथ ही रतन दादा की कुर्सी जिस पर बैठ कर वे लिखा करते , को देख कर बड़ी ख़ुशी हुई। उनकी मेहमाननवाजी का मैं तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ।


ENGLISH VERSION


The epic match between Benia Ameen of Jammu & Kashmir and Nasir Qureshi of Guru Hanuman was one of the greatest battles of modern kushti.

Nasir Qureshi has proved himself to be one of the best wrestlers in India. Nasir rose to fame at Kasan Dangal, where he ruled the arena and became the number one wrestler of India.

Benia is a legendary wrestler best known for his defense and he has beaten almost all the best wrestlers of India so the odds were in his favor.

But Nasir proved too much for him. While Nasir controlled Benia for most of the match, the J&K wrestler caught him off guard and almost pinned him. But Nasir fought him off and trapped Benia in a far side cradle. The crowd was shocked to see Nasir defeat Benia and cheered his upset win. It was a devastating loss for Benia, who had crushed his other opponents at Indore and clearly expected to do the same to Nasir. But that was not to be.

The wrestling fans showered Nasir with money for his amazing feat and the head of the Dangal Committee awarded him a cash prize, a mace, and a belt, and declared him to be the Sitara E Indore of 2017.

Other matches.


Joginder vs Parvesh
Joginder Pahlwan of Ouchandi village is one of the top wrestler of India. He won the title of Hind Kesari recently at Ludhiana. Today he was up against the great hind kesari wrestler Parvesh of Bahadurgarh Haryana. Twice Joginder nearly pinned Parvesh and finally on the third attempt he secured a fall agains the Haryana wrestler.

Kiran vs Bhola
Kiran Bhagat is the best wrestler in Maharashtra, where has won the Maharashtra Kesari title. In Varna recently he battled the Jassa Patti of Punjab. While Jassa Pati pinned him, he put up a great fight and took his opponent down – no small feat when you consider that Jassa Patti is perhaps the greatest kushti wrestler today.
Kiran Bhagat’s opponent today was Bhola of Captain Chandroop Akhada of Delhi. Bhola is ranked second to Joginder and he has won the Bharat Kumar title many times. Their match was intense. Kiran controlled the first half, taking Bhola down and nearly pinning him. But the second half of the match belonged to Bhola. In the end, neither could pin the other and the match ended in a tie.

Hariom vs Ravi Doomchedi
Hariom Pahalwan lived up to his nickname, “The Tractor”, flattening Ravi Doomchedi. But not before Ravi put some dents in Hariom’s reputation. Ravi was on the offensive and manage to gain control over his massive opponent, teaching him a lesson in humility. Ravi couldn’t overcome Hariom’s power in the end, but he put up a good fight and earned his opponent’s respect.

Yudhisthir vs Raj
In another star studded match, Bharat Kesar Yudhisthir Pahlwan went up against Raj Sangte. Both are heavyweight title holders and they put a good show. The match ended in a draw.

Women wrestlers also competed. In one junior match a girl defeated a boy and in another a boy beat a girl.

I am very thankful that Yusuf Qureshi invited me to cover the event. Yusuf Qureshi and his team did great work. Everything was well organized and they honored VIPs as is a tradition of Kushti.

I also wish to thank Olympian Pappu Yadav Pahlwan in whose guesthouse I stayed for free. He has a great guesthouse in the middle of Indore.

While in Indore, I was also able to visit Nakul Patodi, son of legendary Kushti writer and owner ,publisher the “ Bhartiya Kushti “ magazine, Late Sh. Ratan Patodi ji, fondly called “Dada” or big brother. The magazine is in circulation for more than 60 years.

I also received a call from my friend Ganesh Bagadi, who lives in Ujjain, the city of lord Shiva, or Mahakal. He invited me to see the temple. Wrestlers from all over India come to him to see the temple, stay there and wrestle.




Feb 18, 2017

KUSHTI WRESTLING: Netaji Subhash Chandra Bose Memorial Dangal

By Deepak Ansuia Prasad










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नेता जी सुभाष चंद्र बोस मरे नहीं।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्मृति दंगल - गाँव नाथुपुर , गुडगाँव।
सौजन्य से - नाथूपुर गाँव दंगल कमिटी।


जिन लोगों ने देश , सेवा और देशवासियों को सर्वोपरि रख कर , अपना सर्वश्व समर्पण कर दिया। हँसते हँसते फांसी के फंदों पर झूल गए , सीने पर गोली खा गए , यातनाएं सह सह कर प्राण विसर्जन कर दिया पर उफ़ न की। वे कभी भी मरे नहीं , न कभी मरेंगे। भले ही इन्होंने इस भौतिक शरीर का त्याग कर दिया हो पर वे हमेशा हमेशा के लिए जी गए। देश उनके त्याग और बलिदान का हमेशा हमेशा के लिए कर्जदार रहेगा। उनकी कुर्बानियों को कभी न भूल कर हरदम उनके रास्ते पर चलेगा और उनका अनुशरण करेगा।
वह खून कहो किस मतलब का,
जिसमें उबाल का नाम नहीं ?
वह खून कहो किस मतलब का,
आ सके देश के काम नहीं ?
आजादी का परवाना , नेताजी सुभाष चंद्र बोस !
आज 23 जनवरी को देश के इस बांके सपूत का जन्मदिन हैं , जिसने छोटी सी ही उम्र से ज्ञान के सागर में गोते लगाए , देश को गुलामी की बेड़ियों से आज़ाद करने के लिए क्रांति का बिगुल बजाया , जर्मनी जाकर हिटलर से मिले और आजाद हिन्द फ़ौज की स्थापना की , कांग्रेस के अध्यक्ष बने और बाद में अंत तक खिलाफत करते रहे।
शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले !
वतन पे मरने वालों का यहीं बाकीं निशान होगा !!
आज दिल्ली से सटे नाथूपुर गाँव में , जिसे डी एल ऍफ़ फेस -3 भी कहते हैं अमर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर मेला लगा। यह कुश्ती दंगल का मेला था। यहाँ आई जनता को अपनी कुश्तियों के जलवे दिखा सराबोर करने के लिये दूर दराज से पहलवान आये। दंगल कमिटी के सदस्य गोरु, जोनी,कालू , रेनुपाल , देवेंद्र , बेदु ने नेताजी की स्मृतियों का आज के पीढ़ी के लोगों के जहन में एक बार फिर ताजा करने के लिए इस दंगल का खूबसूरत आयोजन किया। इस दंगल में रेफ़री ,जयभगवान , मनीष रहे। गुरु हरपाल ने कॉमेंट्रेटर की भूमिका अदा की , वहीँ घिटोरनी ने राजिंदर पहलवान ने सभी पहलवानो के जोड़ मिलाये।
दंगल की मैं कुश्तियां इस प्रकार रही।
जीतू पहलवान और सोनू अखाडा मांडोठी से छोटू पहलवान।
जीतू ने नए साल की शुरुआत अच्छी कर ली हैं। पहली जनवरी को ही जीतू ने तिरपड़ी के एक बढ़िया पहलवान को चित्त कर नए साल में अपनी पहली जीत का अकाउंट खोल दिया। और बीच में भी जीतू ने कई अच्छी कुश्तियां दिखाई , मुझे व्यस्त होने के कारण उन कुश्तियों को देखने का मौका तो नहीं मिला , लेकिन आज नाथूपुर के दंगल में जीतू ने एक बार फिर बढ़िया कुश्ती दिखा कर दर्शकों का मन मोह लिया। जीतू ने छोटू को चित्त कर दंगल देख रहे दर्शकों में जोश भर दिया। दिल्ली देहात के इस क्षेत्र में जीतू ने अपनी कुश्ती और पहलवानी के जो मापदंड खड़े किये हैं वो सर्वोच्च हैं। उन्ही को लांघ कर आगे का रास्ता बनाने के लिए आज नाथूपुर में पहलवानो की अगली पीढ़ी ने शानदार प्रदर्शन किया। और साबित कर दिया की इस क्षेत्र में पहलवानी की परम्परा की जो विरासत हैं वो आने वाले लंबे समय तक बरकरार रहेगी।

ज्ञानिन्द्र पहलवान गुरु हनुमान और लक्ष्मण पहलवान।
ज्ञानिन्दर गुरु हनुमान अखाड़े से एक अच्छा पहलवान हैं। खलीफा नैनसिंह के सुपुत्र ज्ञानिन्दर तेज कुश्ती लड़ते हैं। गठीले लक्ष्मण से उसकी कुश्ती जोरदार हुई। लक्ष्मण पर अटैक लगा कर ज्ञानिन्देर ने अपनी उम्दा कुश्ती का परिचय दिया तो वहीँ खूबसूरती से बच कर ज्ञानिन्दर को नीचे बिठाने में लक्ष्मण ने कसर नहीं छोड़ी। दोनों पहलवानो का खूब जोर लगा। समय समाप्त होने पर दोनों पहलवानो को बराबर घोसित किया गया।

पवन और रविंदर सोहना
पवन और रविंदर दोनों वजनी पहलवान हैं। पवन सुलतान फिल्म में काम कर चुके हैं वहीँ रविंदर एक अनुभवी पहलवान हैं। दोनों की कुश्ती काफी मशक्कत भरी रही। रविंदर ने पवन को चित्त करने में अपना पूरा जोर लगा दिया , लेकिन नाकामयाब रहे।

नाथुपुर गाँव के बच्चों ने भी बढ़िया कुश्तियां लड़ी जिनमे हैप्पी , गुल्लू , रमेश , सुरेश शानदार कुश्तियां लड़े और जीते। वहीँ पटना में हो रहे जूनियर नेशनल से भी बढ़िया खबर आई। सीरी पहलवान के पुत्र , आकाश यादव पहलवान ने जूनियर नेशनल में मैडल जीत कर गाँव का नाम रोशन कर दिया।


ENGLISH VERSION



Today is 23rd January, the birthday of the great son of India, Netaji Subhash Chandra Bose, who helped start the revolution to set India free from British rule. During WWII, he raised an army of captured Indian soldiers fighting for British and named it “Azad Hind Fauj”.

Today there is a festival in village Nathupur to mark the day of his birth, featuring a dangal, which draws wrestlers from far away.

Goru, Joni, Kalu, Renupal, Devender, Bedu and other members of the committee organized the competition. The announcer, Guru Harpal, tells the gathering about the contributions of Neta Ji Subhash Chandra Bose in our struggle for freedom. Senior coach Jaibhagwaan Manish acts as referee. Rajinder Pahalwan, son of legendary wrestler Late Guru Shyamlal pairs wrestlers and prepares them for the bouts.

Featured Matches


Jeetu Pahalwan vs Mandothi wrestler

Jeetu is a star wrestler of the town. Today he took on a wrestler from Mandothi. His opponent was formidable, but Jeetu is a master of the art of wrestling and pinned the Mandothi wrestler with ease, proving once again that he is one of the best wrestlers in the region.

Gyaninder Pahalwan vs Lakshman Pahalwan

Gyaninder pahlwan is from Guru Hanuman Akhada. His father, Nain Singh also runs an akhada in Gadhi Mandu, Delhi. Gyaninder has guts and stamina and was on the offensive for most of the match, but Lakshman held him off and avoided being pinned and the match ended in a draw.

Pawan vs Ravinder Sohna

Ravinder is a more experienced than Pawan. He dominated Pawan throughout the match but Pawan kept fighting and in the end, Ravinder couldn’t get the fall, so the match ended in a draw.

Others

There were many more matches for younger wrestlers. Wrestlers Happy, Gullu, Ramesh, Suresh of village nathupur fought well and won.

All the younger wrestlers were able to get several matches and got cash prizes each time they wrestled.

As the tradition goes, all the coaches, gurus, khalifa and other dignitaries were felicitated with headgear and some cash prize.